अतुलनीय अतुल

मौसमी बीमारियों पर नियंत्रण और बचाव के बारे में मैने बहुत से लेखों में सलाह दी है, परन्‍तु हमेशा ऐसा लगा क‍ि मेरी सलाह बहरे कानो तक ही पहुंची है. आज पहली बार देख रहा हूं क‍ि मेरी सलाह पर कोई जी जान लगाकर व्‍यक्तिगत रूप से लोगों की मदद करने की को‍श‍िश कर रहा है, तो उसके बारे में ल‍िखने से मैं स्‍वयं को रोक नहीं पा रहा हूं.

अतुल से मेरी मुलाकात लगभग डेढ़ वर्ष पहले हुई जब मैं सरकार की अनुमति लेने के बाद सुपेला के सरकारी अस्‍पताल में नि:शुल्‍क आपरेशन करने के लिये गया. डा. गोपीनाथ उस समय वहां के प्रभारी थे. अतुल संविदा पर फार्मासिस्‍ट के पद पर था. मैने देखा क‍ि अस्‍पताल का भागदौड़ और व्‍यवसथा का अधिकांश काम वही करता था. उसके बाद अतुल से लगातार मिलना होता रहा. मैं बरसात का मौसम शुरू होने पर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के लोगों को ब‍िना मांगे ही मौसमी बीमार‍ियों की रोकथाम की सलाह देता रहता हूं. इस बार भी मैने सभी को सलाह दी. मेरा यह मानना है क‍ि इन बीमार‍ियों से बचाव तभी संभव है जब समुदाय के सभी लोगों की भागीदारी हो और स्‍वास्‍थ्‍य विभाग तक बीमारी की सूचना तत्‍काल पहुंचे. इसके अति‍र‍िक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य विभाग भी सूचना म‍िलते ही तत्‍काल लोगों तक पहुंचे. इसी अवधारणा पर मैने अपनी वेबसाइट पर डेंगू, मलेरिया और स्‍वाइन फलू की जानकारी की क्राउडसोर्सिंग के ल‍िये एक पेज बनाया और एप्‍ड्रायड एप भी बनाया ज‍िससे लोग आधुनि‍क तकनीक का उपयोग करके आसानी से मोबाइल व्दारा यह जानकारी भेज सकें और स्‍वास्‍थ्‍य व‍िभाग इस पर तत्‍काल कार्यवाही करके न केवल मरीज का इलाज करे बल्कि बीमारी पर नियंत्रण भी करे. इस वेबसाइट का पेज मैं नीचे दे रहा हूं.

जैसी आशंका थी, सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने इसपर बहुत रूचि नहीं द‍िखाई, परन्‍तु अतुल को जैसी इसके बारे में पता लगा वह इसका उपयोग करने और लोगों की सेवा करने में लग गया. अतुल आज सुपेला अस्‍पताल में सरकारी सेवा में नहीं है. फ‍िर भी वह इस काम में लगातार लगा है. आपको जानकर आश्‍चर्य होगा क‍ि वह इस सि‍लस‍िले में माननीय मंत्री जी, दुर्ग ज़ि‍ले के कलेक्‍टर तथा मुख्‍य च‍िक‍ित्‍सा अधि‍कारी तक से म‍िल चुका है. वह ब‍िना क‍िसी स्‍वार्थ के स्‍वयं भी रात द‍िन गरीब बस्‍ितयों में घूमकर लोगों को जागरूक कर रहा है, और स्‍वास्‍थ्‍य व‍िभाग के अध‍िकार‍ियों से भी काम करा रहा है. उसके प्रयत्‍नों का ही यह पर‍िणाम है क‍ि भ‍िलाई दुर्ग में पि‍छले मात्र 3 द‍िन में डेंगू के 30 से अध‍िक मरीज़ न केवल खोजे गये है, बल्कि उनका इलाज भी चल रहा है. गरीब बस्तियों में काम करने का उसका उत्‍साह देखते ही बनता है. उसकी इस न‍ि:स्‍वार्थ सेवा और उत्‍साह का फल है क‍ि कोई भी उसका साथ इस अच्‍छे काम मे देने से मना नहीं करता. मेरी जानकारी यह है क‍ि अनेक समाज सेवी लोग उससे प्रेर‍ित होकर डेंगू के मरीज़ों की देखभाल में लग गए हैं.

ऊपर के चित्रों में अतुल डेंंगू से बचाव के पोस्‍टर लगा रहा है, और डेंगू के क‍िसी मरीज़ के ल‍िये रक्‍तदान कर रहा है. उसने डेंगू से बचाव के अनेक वीडि‍यो भी इंटरनेट पर खोजकर सेशल मीड‍िया व्दारा लोगों तक पहुचाए हैं. इसके अत‍िर‍िक्‍त भी वह इन्‍हीं कामों में रात द‍िन लगा है.

मेरी ईश्‍वर से प्रार्थना है क‍ि अतुलनीय अतुल को लोगों का भला करने की और अध‍िक शक्ति प्रदान करें. अतुल जैसे नवयुवकों को देखकर भारत की युवा पीढ़ी के ल‍िये मेरा सर गर्व से ऊंंचा उठ जाता है.

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Comments :

Dr khemraj Sonwani On: 18/09/2018

नेक कार्य के लिए बधाई।

Dr khemraj Sonwani On: 18/09/2018

नेक कार्य के लिए बधाई।

Rakesh Sharma On: 15/09/2018

Well done Atul... you make Dr Alok Shukla n all of us proud.. GOd bless you

Atul Shukla On: 14/09/2018

धन्यवाद सर, मेरे पास शब्द नही कुछ कहने को..........................बस इतना कहुगा आज मेरे जीवन का बहूत बडा achievement है ये दिन कभी नहीं भुल पाऊगा ।

Vaibhav lall On: 14/09/2018

Atul Bhaiya is really an inspiration. We all should learn from him and contribute.

Raghuvansh Mishra On: 14/09/2018

Definitely insperative personality Sir.I salute him.

Raghuvansh Mishra On: 14/09/2018

Definitely insperative personality Sir.I salute him.

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