09-06-2020
लॉकडाउन


कभी सोचा न था
दिन ऐसा भी आयेगा जीवन में
दोस्‍तों से गले न मिल सकेंगे जब

इतने डर गए हैं लोग
कि, चार दोस्‍त चाय पर इकट्ठा नहीं होते
जिनके बिना, शाम गुज़ारती न थी
आज उन्‍हीं से मिलना गवारा न रहा

वो बगिया के फूल, वो गलियों की धूल
वो खोमचे की चाट, वो ढ़ाबे की खाट
गुम हो गए हैं सभी, और रह गए हैं बस
ढंके हुए चेहरे, और मायूसी हर तरफ

ज़िन्‍दगी की चाहत में
जीने से ही तौबा कर ली हमने
इस रुकी हुई ज़िन्‍दगी में
न हंसी है, न फूल, न खुशबू और न तुम ही हो

वापस दे दो मुझे, वो पुराने दिन
कुछ पल के लिये ही सही
जी तो लूं मैं, जी भर कर

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Comments :

Sushil Rathod On: 10/06/2020

वो बगिया के फूल ........ वो मायूसी हर तरफ़, ज़िंदगी की चाहत में ....... और न तुम ही हो। Beautiful ! (शायद ही कोई दिल हो जो इस ख़्याल से ना धड़का हो, मन के संवादों को समेटे और उकेरते चित्र ने मेरे मन से गुफ़्तगू की)…….…...................................... खिड़की से जब भी देखता हूँ.... एक असमंजस... मैं उन्हें देख रहा हूँ या फिर वे मुझे ?... दुनिया को बदलने का कैसा गुमान, नई ऊंचाइयों को छूने का कैसा फ़ितूर ... बेख़बर...मैं उनकी सांसे चुराता रहा, किसी को पिंजरे में बंद तो किसी की खाल से दीवार सजाता रहा। आज सांसे तंग है, उखड़ने का डर है। वो निश्छल, नासमझ मुस्कुराते कह रहे हैं, बहुत दिन हुए, दोस्त.. दिखे नहीं? बाहर भी आओ, इस साफ़ आसमां तले, इस चहचहाहट, हरियाली और हवाओं की ताजगी के बीच तुम अच्छा महसूस करोगे। सब तुम्हारे लिए है। ......क्या आख़िर नासमझों से ही यह दुनिया सुंदर है? सुशील

Madhuri Patnaik On: 10/06/2020

Nahi chahiye aisa aarm, Mujhe apni wahi Bhag doud wali jindgi chahiye, Han mujhe wapas de do wo pu rane din,jisme sukun ke Kuchh pal ho to Mai ji lu ji bhar. ......Man ko bhigo gayi aapki likhi panktiyan

K H NAAZ On: 10/06/2020

बहुत अच्छी लाईन की कवीरा है मेरे दोस्त कीप ईट अप

संतोष कुमार तारक On: 10/06/2020

बहुत ही सुंदर चित्रण आदरणीय सर जी

Sarita Khan On: 10/06/2020

वर्तमान हालात का जीवंत चित्रण

Anima Upadhyay On: 10/06/2020

Reality well said

Nanda deshmuk On: 10/06/2020

प्रेरक, सुंदर

kaushalendra On: 09/06/2020

सादर प्रणाम ! हाँ ! याद आते हैं पुराने दिन, दूर से अपने पास बुलाते हैं वे पुराने दिन । अभी हम सब व्यस्त हैं तनिक, तूफ़ान आया हुआ है अभी, बहुत कुछ गिर गया है, तनिक खड़े हो जायँ, सँभल जायँ, हम फिर जायेंगे अपने उन्हीं दिनों के पास ..जहाँ मनौती के ढेरों दीप जला रखे हैं हमने ...आपने ... सबने ।

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