लक्ष्‍य सुपोषण

बहुत दिनों बाद आज मैं फिर से ब्‍लाग लिखना प्रारंभ कर रहा हूं. कुछ दिनों से देख रहा हूं छत्‍तीसगढ़ के युवा अधिकारी नई ऊर्जा के साथ के साथ बहुत अच्‍छा काम कर रहे हैं. सोचा इन्‍ही नये कामों के बारे मे कुछ लिखा जाये. सोचा कि आज बाल दिवस के अवसर पर बच्‍चों के पोषण के बारे में बात की जाये.

छत्‍तीसगढ़ के लिये यह शर्म की बात है कि, विकास के कई सोपान तय करने के बाद भी, आज भी बड़ी संख्‍या में बच्‍चे कुपोषण से ग्रस्‍त हैं. माननीय मुख्‍य मंत्री जी को इस बात की बड़ी चिंता रहती है. मैने इसके संबंध में उन्‍हें अक्‍सर टेलीविज़न आदि पर बोलते देखा है. उनसे प्रेरणा लेकर अनेक ज़िलों में बच्‍चों के सुपोषण के लिये अभियान चलाया गया है. रायपुर ज़िले में इसे नाम दिया गया है - लक्ष्‍य सुपोषण.

कल मुझे रायपुर में इस कार्यक्रम को नज़दीक से देखने का अवसर मिला. इस कार्यक्रम में अति गंभीर कुपोषण से ग्रस्‍त 819 बच्‍चे चिन्हित किये गये हैं. इन बच्‍चों को प्रतिदिन भरपेट गर्म भोजन देने की व्‍यवस्‍था की गई है. सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह भोजन उन्‍हें उनके घरों में एवं आंगनबाड़ियों में दिया जाता है. इसके लिये उन्‍हें एन.आर.सी. में भर्ती कराने की आवश्‍यकता नहीं है.

बच्‍चों को प्रात: नाश्‍ते में बिस्‍किट, दूध और केला दिया जाता है. दोपहर के भोजन में अंडा और खिचड़ी खाने को मिलती है, और इसके बाद स्‍वादिष्‍ट और पौष्टिक लड़डू भी दिये जाते हैं. बच्‍चों का भोजन उनके घर में ही एक सुपोषण पेटी में रखा जाता है, जिसकी चाबी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पास होती है. इसकी मानीटरिंग के लिये एक एप भी बनाया गया है. हर बार बच्‍चों को भोजन देते समय एप पर उनकी फोटो डाली जाती है. हर्ष का विषय है कि एक माह के समय में ही अधिकांश बच्‍चों का वज़न बढ़ने लगा है. 819 में से 12 बच्‍चे पूरी तरह से सामान्‍य हो गये है.

इस कार्यक्रम का सबसे रोचक पहलू यह है कि यह पूरा कार्यक्रम जनसहयोग से चलाया जा रहा है. इसमें सरकार का एक पैसा भी नहीं लगा है. ज़िला प्रशासन के आग्रह पर रायपुर के लोगों ने आगे बढ़कर इस कार्यक्रम के लिये धन दिया है. एक बच्‍चे को 6 माह के लिये गोद लेने के लिये 12,000/- रुपये की राशि देना होती है. आशा की जाती है कि 6 माह में बच्‍चा सुपोषित हो जायेगा. इस प्रकार दान देने बालों को सुपोषण योध्‍दा का नाम दिया गया है. आप भी यदि सुपोषण योध्‍दा बनना चाहें तो 8120926247 पर रायपुर ज़िला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं. इस कार्यक्रम के लिये रायपुर ज़िले के कलेक्‍टर भारतीदासन और मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी गौरव तो बधाई पात्र हैं ही, साथ ही उनकी टीम के अन्‍य सदस्‍य अशोक पांडे और नेहा अग्रवाल भी तारीफ के हकदार हैं.

प्रदेश के अनेक ज़‍िलों ने माननीय मुख्‍य मंत्री जी से प्रेरणा लेकर मुख्‍य मंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत कार्य प्रारंभ किया है. इनमें से दंतेवाड़ा ज़‍िला विशेष उल्‍लेखनीय है. यह सत्‍य है कि कार्यक्रम में अभी बुहत कुछ किया जाना बाकी है. पोषण को स्‍वास्‍थ्‍य और समाज की अन्‍य बातों से अलग करके नहीं देखा जा सकता. बच्‍चों के सुपोषण के लिये अनेक बातों का ध्‍यान रखना ज़रूरी है, जैसे - कच्‍ची उम्र में विवाह को रोकना, पहला बच्‍चा देर से होना और दो बच्‍चों के बीच अंतर रखना, गर्भवती के स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल, सुरक्षित प्रसव, स्‍तनपान को बढ़ावा देना, बच्‍चों को निमानिया, दस्‍त, मलेरिया आदि बीमारियों से बचाना, आदि. इसके लिये शासन के विभागों के बीच समन्‍वय के अतिरिक्‍त समाज के सभी लोगों के साथ मिलकर काम करने की आवश्‍यकता है. मुझे विश्‍वास है क‍ि मुख्‍यमंत्री सुपोषण अभियान छत्‍तीसगढ़ में जब आगे बढ़ेगा, तो इन बातों को केन्‍द्र में रखा जायेगा. कार्यक्रम के कर्णधारों को यह बात समझनी होगी क‍ि सुपोषण के लिये पौष्टिक आहार देना तो आवश्‍क है ही, परन्‍तु मात्र पौष्टिक आहार देना पर्याप्‍त नहीं है. इसके लिये पूरी सोच और सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव की आवश्‍यकता है. परन्‍तु इस सबके बारे में फिर कभी. आज तो सुपोषण योध्‍दाओं की जय-जयकार करने का अवसर है.

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Comments :

Lalit On: 17/11/2019

पोषण युक्त भोजन न सिर्फ बच्चों बल्कि बड़ों के लिए भी आवश्यक है और अधिकार भी। किन्तु गरीबी , शिक्षा और जागरूकता के अभाव में कुपोषण की समस्या (न सिर्फ देश मे बल्कि छत्तीसगढ़ में भी) न सिर्फ कम आय वाले क्षेत्रों और परिवारों में व्याप्त है बल्कि सम्पन्न माने जाने वाले क्षेत्रों और परिवारों में भी है । क्या पोषण की परिभाषा के WHO के अंतराष्ट्रीय मानकों के द्वारा सेट किये जाने के कारण है? बच्चों में 37% की कुपोषण दर बहुत अधिक और चिंताजनक है। ICDS के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है पर NRC जैसे कार्यक्रम को थोड़ा करीब से देखा है , और महसूस किया है कि ऐसे कार्यक्रम अच्छे तो हैं पर जमीनी स्तर पर इनका अच्छा क्रियान्वयन बहुत ज़रूरी है। अक्सर जिस गंभीरता से किसी कार्यक्रम को शुरू किया जाता है क्रियान्वन स्तर पर वो गंभीरता dilute होती जाती है और खानापूर्ति वाली execution के कारण यथोचित परिणाम नहीं दे पाती है। लक्ष्य सुपोषण अच्छा कदम लग रहा है, पर केवल सेल्फ़ी और मीडिया की एक खबर से उठकर जमीनी स्तर पर स्थिति अच्छी करेगा ऐसी आशा है, शुभकामनाएं। आप काफी वरिष्ट और बुद्धिमान व्यक्ति हैं जो स्वास्थ्य के बारे में काफी गहरी जानकारी रखते हैं और बेहतरी में काफी कुछ किया है और आगे करते रहेंगे ऐसी आशा है।

Lalit On: 17/11/2019

पोषण युक्त भोजन न सिर्फ बच्चों बल्कि बड़ों के लिए भी आवश्यक है और अधिकार भी। किन्तु गरीबी , शिक्षा और जागरूकता के अभाव में कुपोषण की समस्या (न सिर्फ देश मे बल्कि छत्तीसगढ़ में भी) न सिर्फ कम आय वाले क्षेत्रों और परिवारों में व्याप्त है बल्कि सम्पन्न माने जाने वाले क्षेत्रों और परिवारों में भी है । क्या पोषण की परिभाषा के WHO के अंतराष्ट्रीय मानकों के द्वारा सेट किये जाने के कारण है? बच्चों में 37% की कुपोषण दर बहुत अधिक और चिंताजनक है। ICDS के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है पर NRC जैसे कार्यक्रम को थोड़ा करीब से देखा है , और महसूस किया है कि ऐसे कार्यक्रम अच्छे तो हैं पर जमीनी स्तर पर इनका अच्छा क्रियान्वयन बहुत ज़रूरी है। अक्सर जिस गंभीरता से किसी कार्यक्रम को शुरू किया जाता है क्रियान्वन स्तर पर वो गंभीरता dilute होती जाती है और खानापूर्ति वाली execution के कारण यथोचित परिणाम नहीं दे पाती है। लक्ष्य सुपोषण अच्छा कदम लग रहा है, पर केवल सेल्फ़ी और मीडिया की एक खबर से उठकर जमीनी स्तर पर स्थिति अच्छी करेगा ऐसी आशा है, शुभकामनाएं। आप काफी वरिष्ट और बुद्धिमान व्यक्ति हैं जो स्वास्थ्य के बारे में काफी गहरी जानकारी रखते हैं और बेहतरी में काफी कुछ किया है और आगे करते रहेंगे ऐसी आशा है।

प्रदीप साहू On: 14/11/2019

आप हमेशा अपनी रचनात्मक व सृजनात्मक सोच को जमीन पर उतरकर साकार करते हैं।आज बहुत सारी सुपोषण योजना केवल खानापूर्ति कटने व कागज में दिखाने के लिए होती है।आपका प्रयास निश्चित ही रंग लाएगा।

जीतेश्वरी On: 14/11/2019

आपके द्वारा किए जा रहे इस सुपोषण अभियान का स्वागत है सर। आपने जिस निष्ठा से इसे प्रारंभ किया है वह प्रशंसनीय है छत्तीसगढ़ के कुपोषण पीड़ित बच्चों के लिए आपके द्वारा उठाया जा रहा यह कदम किसी वरदान से कम नहीं।आपके इस पहल को सलाम

Nitin Bhansali On: 14/11/2019

इस नेक कार्य में में ओर मेरे साथी भी जुड़ेंगे, राज्य सरकार की इस पहल का स्वागत करता हूं, भारती दासन सर आपकी प्रसाशनिक क्षमता का में कायल हूं. हमारी जहा भी जरूरत है हमे याद कीजियेगा सर. जय हिन्द...

विवेकानंद दिल्लीवार On: 14/11/2019

आदरनीय सर जी से हम सभी शिक्षक प्रेरणा लेते हैं ।एक प्रसाशनिक अधिकारी होते हुय भी अन्य क्षेत्रों मेभीअपना बहुमूल्य योगदान दे रहे है खासकरके शिक्षा एवम स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपने जो कार्य किये हैइसकी जितनी भी तारीफ की जाय कम है ।

विवेकानंद दिल्लीवार On: 14/11/2019

आदरणीय सर।जी आप हम शिक्षकों के लिये प्रेरणादायक है। आप एक प्रसासनिक अधिकारी होने के नाते आपकी ब्यस्तता कोदेख कर मैं आश्चर्य में पड़ जाता हुआप सभी क्षेत्रों में जैसे शिक्षा स्वास्थपर्यावरण में , हुय भीसभी क्षेत्रों में

Avlok Shukla On: 14/11/2019

A new start for undernourished children. A step forward in the direction of health consciousness. Remarkable. Congratulations to the team.

Avlok Shukla On: 14/11/2019

A new start for undernourished children. A step forward in the direction of health consciousness. Remarkable. Congratulations to the team.

Avlok Shukla On: 14/11/2019

A new start for undernourished children. A step forward in the direction of health consciousness. Remarkable. Congratulations to the team.

Avlok Shukla On: 14/11/2019

A new start for undernourished children. A step forward in the direction of health consciousness. Remarkable. Congratulations to the team.

Avlok Shukla On: 14/11/2019

A new start for undernourished children. A step forward in the direction of health consciousness. Remarkable. Congratulations to the team.

Avlok Shukla On: 14/11/2019

A new start for undernourished children. A step forward in the direction of health consciousness. Remarkable. Congratulations to the team.

Avlok Shukla On: 14/11/2019

A new start for undernourished children. A step forward in the direction of health consciousness. Remarkable. Congratulations to the team.

ALOK KUMAR SHARMA On: 13/11/2019

It s excellent initiative of state government and district administration. It s true spirit of empowering our children to provide them nutritious food. The vital and remarkable thing is that there is ownership of society to lead this initiative. This is the best gift to children on Children s Day.

Santosh Kumar Kaushik On: 13/11/2019

बहुत अच्छी पहल पूरे टीम को बहुत बहुत बहुत बधाई ।की पात्र है

Santosh Kumar Kaushik On: 13/11/2019

बहुत अच्छी पहल पूरे टीम को बहुत बहुत बहुत बधाई की पात्र है

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