छत्‍तीसगढ़ी बालगीत

महूँ पढे जातें

लेखक - अजहरुद्दीन अंसारी (अजहर)

दाई ओ महूँ पढे जातें, ददा गा महूँ पढे जातें,
पढ लिख के जिनगी ल गढे जातें ओ,
दाई ओ महूँ पढे जातें, ददा गा महूँ पढे जातें,

बिहनिया चराहूँ बइला गोरु ,संझा चराहूँ छेरी,
रोज जुअरहा इस्कुल जाहूँ नई करव अलढेरी,
जुग हवे विकास के महूँ बढे जातें,
दाई ओ महूँ पढे जातें, ददा गा महूँ पढे जातें,

पार परोसी संगी साथी जम्मो पढे जाथे,
नावा नावा आनी बानी के बात ल बताथे,
कइथें , सीढी लगे हे सरगे ओमा महूँ चढे जातें,
दाई ओ महूँ पढे जातें, ददा गा महूँ पढे जातें,

देख तो गा सहरीया टूरा कम्प्यूटर चलाथे,
झूला असन कुर्सी म बईठे बटन ल दबाथे,
मोरो मन ह करथे महूँ नोकरी पातें,
दाई ओ महूँ पढे जातें, ददा गा महूँ पढे जातें.

गिनती

लेखिका - प्रतिभा पांडेय

एक, दो, तीन
तीन, तीन, तीन
कचरा ल बीन,
बीन, बीन, बीन

चार, पांच, छः
छः, छः, छः
कचरा झन फेक
कचरा झन फेक

सात, आठ, नव
नव, नव, नव
बीजा ल बोव
बोव, बोव, बोव

दस, दस, दस
दस, दस, दस
पेड़ लगाओ बस

फुगड़ी गीत

संकलन- दीपक कुमार कंवर

गोबर दे बछरू गोबर दे
चारो कोठा ल लीपन दे

राजा राम के पूतरी
खेलन भाई फूगड़ी

छेना बीने गएन ता
एक बुंदेला पाएन ता

ममा ल बताएन ता
ममा दीहिस गुदे गुदा

हमला दीहिस फोकला
फोकला ला का करबो

रही जाबो तिजा
तिजा के बिहान दिन

रंग-रंग के लुगरा
खोल दे रे भउजी कपाट के खीला

एक गोड़ मा लाली भाजी, एक गोड़ मा कपूर
कतेक ला मानो मै देवर ससूर

भइया गेहे नगर म भौजी टंगे बादर म
भौजी के पयरी बाजे रायपुर ले सुनावत हे

फुगड़ी रे फांफा फुगड़ी रे फुगड़ी रे .......

हमर छत्तीसगढिय़ा खेल

लेखिका - संतोषी साय

चलव संगी खेलबो, हमर छत्तीसगढ़िया खेल
किसम-किसम के खेल रे संगी,
जेला सबे भुलाय।
खेलबो संगी बांटी, जेकर ले सीखे गिनती,
भोटकुल अउ कुड़हिल घलो खेल के,
सम-विषम ल सीखबो ।

कबड्डी हमर राजकीय खेल आय,
जेला नइ जाने त काय पाय,
फुगड़ी के गाना म अउ
सुआ के हाना म,
रिस्ता-नाता,तीज-तिहार अउ
धरम-करम समाय।

अटकन-बटकन ल जाने त,
जिनगी के पार ल पाय।
भौंरा, गुलेल अउ डण्डा पचरंगा,
जाने कति नंदाय,
अब के मुबाइल के गेम ल देखय त
बबा मन खखवाय,
चलव संगी खेलबो,
हमर छत्तीसगढ़िया खेल,
किसम-किसम के खेल रे संगी
जेला सबे भुलाय।

Visitor No. : 1638376
Site Developed and Hosted by Alok Shukla